Women's reservation bill 2026 : लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने से देश की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा जैसे दलों के इस रुख को मातृशक्ति के अधिकारों पर कड़ा प्रहार माना जा रहा है। विपक्षी दलों द्वारा नारी शक्ति के सपनों को कुचलने और महिला सशक्तिकरण की राह में रोड़ा अटकाने के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
इतिहास गवाह रहेगा कि जब देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में उनका वाजिब हक मिलने वाला था, तब इंडी गठबंधन के घटक दलों ने अपनी महिला विरोधी राजनीति का परिचय दिया। कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों ने सदन में इस महत्वपूर्ण बिल का विरोध कर यह साबित कर दिया है कि वे महिलाओं के सम्मान और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के सबसे बड़े विरोधी हैं।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने संसद में अपने स्पष्ट वक्तव्य के माध्यम से विपक्ष की हर आशंका को निर्मूल कर दिया था। सरकार की ओर से यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया था कि बिल लागू होने से किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय या नुकसान नहीं होगा। इसके बावजूद, विपक्षी दलों ने हठधर्मिता दिखाते हुए करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सपनों को कुचलने का काम किया।
यह कृत्य न केवल शर्मनाक है, बल्कि उन राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र को भी उजागर करता है जो मंचों से 'महिला सशक्तिकरण' की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। देश की नारी शक्ति अपने इस अपमान और अधिकारों के हनन को कभी नहीं भूलेगी और आने वाले समय में इन दलों को इसका कड़ा जवाब देगी।

0 टिप्पणियाँ